JPNIC, रिवर फ्रंट, हाईकोर्ट… जिन प्रोजेक्ट्स पर छाती फुला रहे थे अखिलेश, योगी ने उनकी ‘हवा’ निकाल दी!

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योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में सरकारी निर्माण कार्यों में हुए भ्रष्टाचार के मुद्दे को उठाते हुए अखिलेश यादव को घेरा। उन्होंने गोमती रिवर फ्रंट, जेपीएनआईसी और लखनऊ बेंच की बिल्डिंग के निर्माण में भ्रष्टाचार का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि ये सब सत्ता प्रायोजित डकैती के उदाहरण हैं और ये कारनामे हमारे नेता प्रतिपक्ष के समय के ही हैं।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को यूपी विधानसभा में समाजवादी पार्टी सरकार और अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने सपा सरकार के कार्यकाल में हुए निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार को लेकर नेता प्रतिपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने अखिलेश सरकार को सत्ता प्रायोजित डकैती का सबसे अच्छा उदाहरण बताया और कहा कि समाजवादियों के कारनामे अभी तक लोग भूले नहीं हैं। उन्होंने गोमती रिवर फ्रंट, जेपीएनआईसी और हाई कोर्ट के लखनऊ बेंच की बिल्डिंग के निर्माण में कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाते हुए अखिलेश यादव को घेरा और तंज कसते हुए कहा कि ये सब विदेश से डिग्री प्राप्त किए हुए हमारे नेता प्रतिपक्ष के समय के ही कारनामे हैं।

योगी आदित्यनाथ ने कहा, ‘अखिलेश यादव हर मुद्दे को ये बताने की कोशिश करते हैं कि ये समाजवादियों ने किया है। समाजवादियों के कारनामे तो लोग अब तक नहीं भूले नहीं हैं। हर व्यक्ति जानता है कि ये लोग यूपी में कैसे-कैसे खेल खेलते थे। किस-किस प्रकार के कारनामे होते थे। योगी ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव प्रदेश के अंदर सत्ता प्रायोजित डकैती के सबसे अच्छे उदाहरण हो सकते हैं और किस रूप में हो सकते हैं? उनमें एक उदाहरण है- जेपीएनआईसी। इसका जो मूल डीपीआर है, वह केवल 265 करोड़ रुपये आंका गया था और इसके बाद इस पर 821 करोड़ खर्च हो गया। फिर भी यह पूरा नहीं हो पाया। हमारी सरकार 6 साल से आई है, लेकिन 6 साल पहले आप क्या कर रहे थे?

योगी ने आगे कहा, ‘गोमती रिवर फ्रंट की स्थिति का जो पीपीआर बना था वह 167 करोड़ का था। डीपीआर 346 के आसपास किया गया। फिर 2015 में इसको बढ़ाकर ये लोग 656 करोड़ पर लेकर गए। फिर जून 2016 में इसी डीपीआर का एस्टिमेट 1513 करोड़ का था और 1437 करोड़ खर्च करने के बाद भी काम अधूरा पड़ा रहा।’ उन्होंने कहा, ‘लखनऊ बेंच का जो भवन बना है, उसमें जनता का पैसा लगा है। वर्तमान में 20 जज वहां बैठते हैं लेकिन चैंबर 76 बनाए गए। इसकी जो पीपीआर थी, वह भी 46 करोड़ के आसपास थी। बाद में बढ़कर 771 करोड़ किया गया। फिर 1561 करोड़ इस पर खर्च किए गए। लाखों रुपया आज भी इसके मेंटेनेंस पर खर्च होता है।

योगी ने कहा कि 76 चैंबर बने हैं और जजेस बैठ रहे हैं मात्र 20। बाकी 56 खाली और उसके मेंटेनेंस के नाम पर प्रदेश का पैसा खर्च हो रहा है। ये कारनामे किसी और के नहीं, ये विदेश से डिग्री प्राप्त किए हुए हमारे नेता प्रतिपक्ष के समय के ही कारनामे हैं इसलिए जो प्रदेश के बारे में इतनी गलत धारणा बनी थी, जो यहां का नौजवान अपनी पहचान को छिपाता था,इन्हीं कारणों से छिपाता था।

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