योगी सरकार ने मेडिकल डिवाइस पार्क, मेडटेक पार्क और बल्क ड्रग पार्क की दिशा में बढ़ाए कदम.
कभी बीमारू प्रदेश कहा जाने वाला उत्तर प्रदेश आज योगी सरकार के प्रयासों से स्वास्थ्य सेवाओं में कई उपलब्धियां दर्ज कर रहा है। प्रदेश को 2023 में स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतर प्रदर्शन के लिए कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। वहीं योगी सरकार ने प्रदेश को दवा निर्माण का हब बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाये हैं। इसी का नजीता है कि आज प्रदेश में मेडिकल डिवाइस पार्क, बल्क ड्रग पार्क, मेडटेक पार्क मूर्त रूप ले रहे हैं। इसके अलावा उपचार पर भी जीरो पॉकेट खर्च पर काम कर रही योगी सरकार ने काफी सराहनीय कार्य किये हैं। यही नहीं इस वर्ष योगी सरकार ने यूपी के लोगों को कई अन्य सौगातें भी दी हैं।
उपचार पर जीरो पॉकेट खर्च पर काम कर रही योगी सरकार
चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से इस वर्ष प्रदेश के जिला चिकित्सालयों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं देने पर 46 जिलों की 81 चिकित्सा इकाइयों को नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस प्रमाणपत्र दिया गया है, जिसमें 43 जनपद स्तरीय, 16 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 22 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं। वहीं प्रदेश के अन्य चिकित्सा इकाइयों को एनक्यूए प्रमाण पत्र से भी नवाजा गया है।
चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से इस वर्ष प्रदेश के जिला चिकित्सालयों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं देने पर 46 जिलों की 81 चिकित्सा इकाइयों को नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस प्रमाणपत्र दिया गया है, जिसमें 43 जनपद स्तरीय, 16 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 22 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं। वहीं प्रदेश के अन्य चिकित्सा इकाइयों को एनक्यूए प्रमाण पत्र से भी नवाजा गया है।
जच्चा-बच्चा की मृत्यु दर में कमी लाने को दी जा रही एसबीए ट्रेनिंग
योगी सरकार प्रदेश में गर्भवती महिलाओं को सौ प्रतिशत सुरक्षित प्रसव की सुविधा देने और मातृ-शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए प्रदेश के प्रसव केंद्र पर तैनात एएनएम, एलएचवी (लेडी हेल्थ विजिटर), स्टाफ नर्स, आयुष महिला डॉक्टर्स की क्षमता को बढ़ाने के लिए स्किल्ड बर्थ अटेंडेंट (एसबीए) ट्रेनिंग को बढ़ावा दिया है। इसका मुख्य लक्ष्य नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 के अनुसार प्रति लाख डिलीवरी के वक्त मातृ मृत्यु दर जो 167 है, उसे कम करके वर्ष 2030 तक 70 पर लाना है। इसी तरह नवजात शिशु मृत्यु दर (प्रति एक हजार जीवित प्रसव) 28 है, जिसे वर्ष 2030 तक 12 तक लाने का लक्ष्य रखा गया है। ट्रेनिंग में स्टॉफ को एक्टिव मैनेजमेंट ऑफ थर्ड स्टेज ऑफ लेबर की जानकारी भी दी गई ताकि संक्रमण को पूरी तरह रोका जा सके। प्रदेश की करीब पांच हजार एएनएम, एलएचवी, स्टाफ नर्स और आयुष महिला डॉक्टर को एसबीए की ट्रेनिंग दी गई।
योगी सरकार प्रदेश में गर्भवती महिलाओं को सौ प्रतिशत सुरक्षित प्रसव की सुविधा देने और मातृ-शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए प्रदेश के प्रसव केंद्र पर तैनात एएनएम, एलएचवी (लेडी हेल्थ विजिटर), स्टाफ नर्स, आयुष महिला डॉक्टर्स की क्षमता को बढ़ाने के लिए स्किल्ड बर्थ अटेंडेंट (एसबीए) ट्रेनिंग को बढ़ावा दिया है। इसका मुख्य लक्ष्य नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 के अनुसार प्रति लाख डिलीवरी के वक्त मातृ मृत्यु दर जो 167 है, उसे कम करके वर्ष 2030 तक 70 पर लाना है। इसी तरह नवजात शिशु मृत्यु दर (प्रति एक हजार जीवित प्रसव) 28 है, जिसे वर्ष 2030 तक 12 तक लाने का लक्ष्य रखा गया है। ट्रेनिंग में स्टॉफ को एक्टिव मैनेजमेंट ऑफ थर्ड स्टेज ऑफ लेबर की जानकारी भी दी गई ताकि संक्रमण को पूरी तरह रोका जा सके। प्रदेश की करीब पांच हजार एएनएम, एलएचवी, स्टाफ नर्स और आयुष महिला डॉक्टर को एसबीए की ट्रेनिंग दी गई।
(Courtesy by; Patrika)


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