लखनऊ में 44 सौ लोग ऐसे चिंहित किए गए है जिन्होंने कुत्ता तो पाला है लेकिन नगर निगम से उसका लाइसेंस नहीं बनवाया है जबकि बिना लाइसेंस आप कुत्ते को पाल नहीं सकते हैं। लाइसेंस भी कई शर्तों का पालन करने पर ही बनता है। बता दें कि नगर निगम की लापरवाही से लोग लाइसेंस बनवाने में सक्रिय भूमिका नहीं निभाते हैं।
शहर में 44 सौ लोग ऐसे चिंहित किए गए है, जिन्होंने कुत्ता तो पाला है लेकिन नगर निगम से उसका लाइसेंस नहीं बनवाया है, जबकि बिना लाइसेंस आप कुत्ते को पाल नहीं सकते हैं। लाइसेंस भी कई शर्तों का पालन करने पर ही बनता है।
वित्तीय वर्ष 2022-2023 में 82 सौ कुत्तों का लाइसेंस बनाया गया था, इसमे देसी लेकर विदेशी प्रजाति के भी कुत्ते थे लेकिन अभी तक लाइसेंस बनवाने वाले की संख्या 38 सौ तक ही पहुंची है। वैसे तो शहरी क्षेत्र में कुत्ता पालने वालों की बड़ी संख्या है लेकिन कुछ ही लोग लाइसेंस बनवाते हैं।
इसका कारण यह भी है कि नगर निगम की लापरवाही से लोग लाइसेंस बनवाने में सक्रिय भूमिका नहीं निभाते हैं और नगर निगम की तरफ से ऐसे लोगों के खिलाफ नियमित कोई अभियान नहीं चलता है। अगर पिछले साल बने लाइसेंस को देखा जाएगा तो एक अप्रैल से अभी तक 44 सौ लोग हैं, जो नगर निगम में पंजीकृत हैं लेकिन लाइसेंस बनवाने नहीं पहुंचे हैं।
यह है नियम रैबीज टीका लगाने का प्रमाण पत्र और कुत्ता पालन करने का शपथ पत्र देना पड़ता है। शपथ पत्र इस बात का होता है कि कुत्ता पालने से आसपास के निवासियों को कोई आपत्ति नहीं है। दो सौ 200 वर्ग मीटर के क्षेत्रफल तक दो कुत्ते पालने की अनुमति दी जाती है।
विदेशी प्रजाति के कुत्तों के साथ क्रास बीट का लाइसेंस शुल्क एक हजार एक हजार रुपये तथा देसी कुत्ते का लाइसेंस शुल्क दो सौ रुपये लाइसेंस न होने पर पांच हजार के जुर्माने का प्रावधान है और जुर्माना न देने पर कुत्ते को जब्त करने का भी अधिकार है। ” 18 से 20 दिसंबर तक कुत्तों का लाइसेंस चेकिंग अभियान चलाया जाएगा। लाइसेंस न मिलने पर पांच हजार का जुर्माना और जुर्माना अदा न करने पर कुत्तों को जब्त किया जाएगा। डा. अभिनव वर्मा पशु कल्याण अधिकारी नगर निगम
(Courtesy by;Jagran)


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