लखनऊ में आयोजित गोमती पुस्तक मेला में पाठकों, लेखकों और प्रकाशकों की अच्छी हलचल दिखाई दे रही है. पुस्तक मेला में भारतीय भाषा दिवस के अवसर पर कई कार्यक्रम आयोजित किए गए. यहां अलग-अलग भाषा के स्टॉल पर सजी पुस्तकों को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है.
राष्ट्रीय पुस्तक न्यास- एनबीटी के स्टॉल पर लगभग सभी भारतीय भाषाओं के साहित्य का प्रदर्शन किया गया है. नेशनल बुक ट्रस्ट के स्टॉल पर हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी, अवधी और संस्कृत में पुस्तकें उपलब्ध हैं. क्रॉसवर्ड की सेंटर टेबल पर जहां पाठकों के लिए आधी कीमत पर पुस्तकें उपलब्ध हैं, वहीं स्टॉल 26 से 27 की खास बात है कि यहां हिंदी और अंग्रेजी में फिक्शन और नॉन फिक्शन पुस्तकों को लेकर पाठकों में खासा रुझान है. खास बात ये है कि यहां उचित रेट पर आप अपनी पुरानी पुस्तकों को बेच भी सकते हैं.
मातृभाषा को व्यवहार में लाने की जरूरत
पुस्तक मेला के मंच पर भारतीय भाषा दिवस के अवसर पर चर्चित कवि बद्री नारायण ने कविताओं के माध्यम से मां, गालिब से बातचीत और समसामयिक विषयों पर कविताएं सुनाईं. कविताओं को आनंद ले रहे युवाओं को उन्होंने सफल रचनाकार के गुणों के बारे बताते हुए कहा, ‘एक अच्छे कलाकार में विचारों में रहकर विचारधारा से पार जाने की भी काबिलियत होती है. हम अपनी मातृभाषा को व्यवहार में लाकर, अनुवाद कार्य और पुराने लोगों के सम्मान से भाषा को जीवित रख सकते हैं.’
भाषा प्रोन्नयन में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास का जो योगदान रहा है, अब उसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अमेजन के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने की मुहिम की शुरुआत भी गोमती पुस्तक महोत्सव में की गई है. अब 70 से अधिक भारतीय भाषा की किताबें अमेजन के मातृभाषा बुकस्टोर पर उपलब्ध होंगी
लखनऊ की पहचान यहां के लोगों से है, उनकी अदब से है, लखनऊ एहसास है, सोच है. यह बात गोमती पुस्तक महोत्सव की समिति के सदस्य और यूनिवर्सल बुकसेलर के सह संस्थापक चंद्र प्रकाश ने कही. उन्होंने किसी शहर की संस्कृति को समझने पर जोर देते हुए कहा कि किसी बुकशॉप में एक शहर का सार जुड़ा है. उसमें शहर की सांस्कृतिक धरोहर के दर्शन होते हैं.
बच्चों के सामने हुनर को पहचानने का अवसर
बाल मंडप में मनोचिकित्सक और कथावाचक द्युतिमा शर्मा ने बच्चों को प्रसिद्ध लेखक रस्किन बॉन्ड के एक पात्र बिनिया की कहानी सुनाई. इस सत्र में सीएमएस, केंद्रीय विद्यालय और एमिटी इंटरनेशनल स्कूल के सैकड़ों विद्यार्थियों ने बाल गतिविधियों में भाग लिया और अपने हुनर को मंच पर प्रस्तुत किया. द्युतिमा शर्मा ने खेल-खेल में बच्चों को बताया कि हमें किसी की कही गई बात पर भरोसा नहीं करना चाहिए. पुस्तक मेला में बच्चों के संचार और अभिव्यक्ति कौशल को बेहतर बनाने की कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें एजुकेटर भास्कर इंद्रकांति ने बच्चों को रोचक गतिविधियों के माध्यम से बातचीत करने, दृष्टिकोण को बेहतर बनाने के तरीके समझाए.
पुस्तक मेला में सबसे ज्यादा आनंद स्कूली बच्चे ले रहे हैं. उनके लिए चित्र, कहानियों की पुस्तकें हैं, अपनी कल्पना के जरिये कहानी बुनने का अवसर है और साथ में खेल-खेल में उन्हें पर्यावरण, नदियों के संरक्षण के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है. सीएमएस की शिक्षिका नमिता रजवार ने एनबीटी, इंडिया द्वारा आयोजित पुस्तक मेले को बच्चों के विकास में एक महत्वपूर्ण कदम बताया.
(Courtesy by ; News18)


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