यह फैसला सुप्रीम कोर्ट द्वारा किया गया है और इसमें संपत्ति के टाइटल ट्रांसफर के लिए रजिस्टर्ड दस्तावेज की आवश्यकता को लेकर महत्वपूर्ण दिशा बताई गई है। इसके अलावा, फैसले में यह भी स्पष्ट है कि संपत्ति का मालिकाना हक सिर्फ रजिस्टर्ड दस्तावेज के माध्यम से ही हो सकता है।
यहां एक पक्ष ने संपत्ति का मालिकाना हक गिफ्ट डीड के आधार पर दर्ज करने का दावा किया है, जबकि दूसरे पक्ष ने पावर ऑफ अटॉर्नी, हलफनामा, और सेल एग्रीमेंट के आधार पर दावा किया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से यह देखा कि बिना रजिस्टर्ड दस्तावेज के अचल संपत्ति का मालिकाना हक ट्रांसफर नहीं हो सकता। इसलिए, प्रतिवादी के दावे को खारिज किया गया है।
यह फैसला संपत्ति के मालिकाना हक को लेकर सुप्रीम कोर्ट की दृष्टि को मजबूत करता है और संपत्ति विवादों में रजिस्टर्ड दस्तावेज की महत्वपूर्णता को बढ़ाता है।

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